क्या आप आजादी के पूर्व के दलित नेता जोगेन्द्र नाथ मंडल को जानते हैं?

क्या आप आजादी के पूर्व के दलित नेता जोगेन्द्र नाथ मंडल को जानते हैं? बंगाल में १९४६ में बनी सुहरावर्दी सरकार में मंत्री रहे जोगेंद्रनाथ मंडल ने हर कदम पर मुस्लिम लीग का समर्थन किया. विभाजन के बाद बनी पाकिस्तान सरकार में कानून और श्रम मंत्री बने. किन्तु जल्द ही दलित मुस्लिम भाई भाई नारे का यथार्थ उनकी सामने आ गया. पाकिस्तान का लक्ष्य पा लेने के बाद मुस्लिम लीग अपने दर उल इस्लाम को काफिरों से मुक्त करने के एजेंडे पर जुट गयी. फिर उनका क्या हुआ?
दलितों को मुस्लिम कट्टरपंथियों के भयावह उत्पीडन का शिकार होना पड़ा. आठ अक्टूबर १९५० को तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री लियाकत अली को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, "सिलहट जिले के हबिबगढ़ में हिंदुओं, खासकर अनुसूचित जाती के लोगों के साथ पुलिस और सेना का बर्बर अत्याचार विस्तार से बताने योग्य है. स्थानीय पुलिस और मुसलमानों ने निर्दोष औरतों मर्दों को बर्बरतापूर्वक प्रताड़ित किया, औरतों की आबारू लूटी गयी, उनके घरों को तोड़कर उनके समान लुटे गए. शहर में जहाँ भी हिंदू दिखे, उन्हें मार डाला गया. पुलिस के अला अधिकारीयों की मौजूदगी में सब कुछ होता रहा."
आगे उन्होंने लिखा है की ढाका और पूर्वी बंगाल में करीब १०००० हिंदू मारे गए हैं. पश्चिमी पंजाब में अनुसूचित जाती के एक लाख लोग थे. बड़ी संख्या में इनका मतांतरण किया गया है. शरिया की व्यवस्था में केवल मुसलमान ही शासक हैं, बाकी जिम्मी (जान बख्शने के बदले जजिया दने वाले गैर मुस्लिम) हैं. मैं अपनी आत्मा पर इस झूठ और छलावे का और बोझ ढो नहीं सकता. इसलिए आपके मन्त्रिमन्डल से त्यागपत्र दे रहा हूँ. भोले भाले बेचारे दलित हिंदुओं को आसान शिकार बनाने की मुस्लिम लीग की उस रणनीति को आज ओवैशी ने अपना लिया है और उन्हें बरगलाने केलिए जय मीम और जय भीम का नारा लगा रहा है और रोहित वेमुला जैसे हजारों लोगों को बरगला कर उन्हें अपने ही देश धर्म का दुश्मन और गद्दार बना रहा है. दुर्भाग्य से पहले की तरह इस बार भी इस षड्यंत्र को नीच और गद्दार कम्युनिष्टों का समर्थन और सहयोग प्राप्त है. दलित मुस्लिम गठजोड़ का समर्थन कर कम्युनिष्ट शेष भारत के दलितों को भी इस्लामी तलवार के निचे लाने का षड्यंत्र कर रहा है.
ओवैशी दलित हिंदुओं को सब्ज बाग दिखा रहा है की दलित मुस्लिम मिलकर भारत पर शासन कर सकते हैं और साथ में यह सच्चाई भी बता रहा है की जब दलित मुसलमानों का राज भारत में होगा तो मुसलमान लाल किला और ताजमहल बनाएंगे और दलित मजदूर उसे बनाएंगे. बिल्कुल सही कहा है, परन्तु उन दलित मजदूरों को दो वक्त की रोटी मिल जायेगी इसकी क्या गारंटी है. भारत का इतिहास तथा पाकिस्तान-बंगलादेश का वर्तमान तो यही प्रदर्शित करता है की दलितों को जीने का अधिकार भी नहीं है मुस्लिम शासन में. यह खतरनाक है की मुसलमानों के कंधे से कंधे मिलाकर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले गद्दार कम्युनिष्ट दलितों को मुसलमानों का साथ सहयोग करने केलिए तैयार कर फिर से भारत विभाजन और दलितों के संहार की नीब रख रहे हैं.
इतना ही नहीं ये दलित हिंदुओं के साथ ओबीसी को भी भरमाने की कोशीश कर रहे हैं. दरअसल इनका निशाना केवल दलित हिंदू ही नहीं है बल्कि ये इस निति पर कार्य कर रहे हैं की दलितों और ओबीसी के सहयोग से ब्राह्मणों और राजपूतों को समाप्त कर सत्ता हथियाया जाय और फिर सत्ता में आने के बाद दलितों को समाप्त करना इनके बाएं हाथ का खेल होगा.

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